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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

बेचारा आदमी वह होता है; जो समझता है कि मेरे कारण तमाम हलचल हो रही है, पर वास्तव में उनके कारण कोई छिपकली भी कीड़ा नहीं पकड़ रही है। बेचारा आदमी वह होता है, जो समझता है कि मेरे सब दुश्मन हैं, पर सही यह है कि कोई उस पर ध्यान नहीं देता। बेचारा आदमी वह होता है, जो समझता है कि मैं वैचारिक क्रांति कर रहा हूँ और लोग उससे सिर्फ़ मनोरंजन करते हैं। वह आदमी सचमुच बड़ा दयनीय होता है, जो अपने को केंद्र बनाकर सोचता है।