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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

बड़े आदमियों की इमारतें ख़ूबसूरत दिखें, इसके लिए झोपड़ियाँ नष्ट कर दी जाएँ और इस सुधार में तुर्कमान गेट जैसी गोली चले, तो फिर पूँजीवादी समाजवाद ही इस देश में आएगा।