Font by Mehr Nastaliq Web

हरिशंकर परसाई के उद्धरण

बच्चा जब माँ के पेट में आता है, तभी से पोथी-पत्री और पूजा शुरू हो जाते हैं। आदमी पैदा हुआ तो ब्राह्मण तैयार बैठा है। फिर चालू होता है लंबा सिलसिला—छठी, नामकरण, मुंडन, कनछेदन, जनेऊ, विवाह—सब में है ब्राह्मण। आदमी मर जाए तो तेरहवें दिन ब्राह्मण भोजन करके दक्षिणा ले जाएँगे। आगे जब तक उसका वंश चलेगा, हर साल पितृपक्ष में ब्राह्मण भोजन करेगा उसी के नाम से, और दक्षिणा ले लेगा।