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कुँवर नारायण के उद्धरण

बदलते संदर्भों में; मनुष्य के सबसे कम उद्घाटित या विलुप्त होते जीवन-स्त्रोतों की खोज और भाषा में उनका संरक्षण, शायद आज भी कविता की सबसे बड़ी ताक़त है।