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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

बचपन से हमने केवल बाहरी वस्तुओं में मनोनिवेश करना सीखा है, अंतर्जगत् में मनोनिवेश करने की शिक्षा नहीं पाई। इसी कारण हममें से अधिकांश, आभ्यंतरिक क्रिया-विधि की निरीक्षण शक्ति खो बैठे हैं।