Font by Mehr Nastaliq Web

स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

बेटा-बेटी किसी के भी हो, विवाह के नाम से मैं घृणा करता हूँ। अहमकों! तुम क्या यह कहना चाहते हो कि मैं किसी को बंधन में डालने में सहायता करूँ? यदि मेरे भाई-बहन विवाह कर ले, तो मैं उसे दूर कर दूँगा। इस संबंध में मैं दृढ़संकल्प हूँ।