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कुँवर नारायण के उद्धरण

आज कविता के संकट का एक कारण यह भी जान पड़ता है कि कवि जिस यथार्थ से क्षुब्ध है, उसके साथ न तो वह समझौता ही कर पाता है; न उसके विरुद्ध कोई कारगर लड़ाई ही, क्योंकि एक स्तर पर अगर वह आत्मिक रूप से नष्ट होता है, तो दूसरे पर भौतिक रूप से।