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सुमेर सिंह राठौड़

1994 | जैसलमेर, राजस्थान

नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय।

नई पीढ़ी के कवि। गद्य-लेखन और फ़ोटोग्राफ़ी में भी सक्रिय।

सुमेर सिंह राठौड़ के बेला

01 अगस्त 2026

‘मसिजीवी होना तो भूखे मरना है’

‘मसिजीवी होना तो भूखे मरना है’

खिड़की के सीखचों पर फड़फड़ाते हुए कबूतर आकर बैठते हैं और फिर उड़ जाते हैं। यह जोधपुर में अप्रैल-2019 की एक दुपहर है—इतनी गर्म कि पीठ में काँटे चुभ रहे हों जैसे। मेरा एक दोस्त मुझे शहर की पतली गलिय

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