Font by Mehr Nastaliq Web
Sujata's Photo'

सुजाता

1978 | दिल्ली

सुपरिचित कवयित्री-कथाकार और अनुवादक। स्त्रीवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवयित्री-कथाकार और अनुवादक। स्त्रीवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।

सुजाता के बेला

14 जनवरी 2026

ये बोझ कोई मज़हब नहीं उठा सकता

ये बोझ कोई मज़हब नहीं उठा सकता

अगर कोहाट में तब दंगे न हुए होते तो कमले की ससुराल वहीं होती, रावलपिंडी नहीं। रहीम ख़ान उन दिनों वहीं था। सब उसका आँखों देखा था। रहीम ने लालाजी की तरफ़ से जगप्रकाश अरोड़ा के ख़ानदान के तीसरे लड़के के लिए

Recitation