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लवली गोस्वामी

1987 | धनबाद, झारखंड

सुपरिचित-सम्मानित कवि-लेखक। दो कविता-संग्रह ‘उदासी मेरी मातृभाषा है’ और ‘पंखुड़ी की ढाल’ तथा एक उपन्यास ‘वनिका’ प्रकाशित। दर्शन और मिथकशास्त्र में भी दख़ल। इस विषय पर एक पुस्तक 'प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता' चर्चित।

सुपरिचित-सम्मानित कवि-लेखक। दो कविता-संग्रह ‘उदासी मेरी मातृभाषा है’ और ‘पंखुड़ी की ढाल’ तथा एक उपन्यास ‘वनिका’ प्रकाशित। दर्शन और मिथकशास्त्र में भी दख़ल। इस विषय पर एक पुस्तक 'प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता' चर्चित।

लवली गोस्वामी का परिचय

मूल नाम : लवली गोस्वामी

जन्म : 05/01/1987 | धनबाद, झारखंड

लवली गोस्वामी [जन्म : 1987] सुपरिचित-सम्मानित कवि-लेखक हैं। वह झारखंड के धनबाद ज़िले की मूलवासी हैं और हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन करती हैं। उनकी कविताओं की दो पुस्तकें ‘उदासी मेरी मातृभाषा है’ [2019] और ‘पंखुड़ी की ढाल’ [2024] प्रकाशित हो चुकी हैं। इस अवधि के बीच उनका एक उपन्यास ‘वनिका’ [2023] भी प्रकाशित हुआ। ये तीनों पुस्तकें वाणी प्रकाशन [नई दिल्ली] से प्रकाशित हुई हैं। ‘उदासी मेरी मातृभाषा है’ को वर्ष 2022 में केदारनाथ सिंह स्मृति सम्मान प्राप्त हुआ। उनकी कविताएँ कुछ भारतीय और विदेशी भाषाओं में समय-समय पर अनूदित होती रही हैं। वह दर्शन और मिथकशास्त्र में भी दख़ल रखती हैं। इस विषय पर उनकी पुस्तक 'प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता' [दख़ल प्रकाशन, प्रथम संस्करण : 2015] भी चर्चा में रही है।

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