दुनिया में नाम कमाने के लिए कभी कोई फूल नहीं खिलता है।
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हमारे आलस्य में भी एक छिपी हुई, जानी-पहचानी योजना रहती है।
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फ़ुरसत निकालना भी एक कला है। गधे हैं जो फ़ुरसत नहीं निकाल पाते। फ़ुरसत के बिना साहित्य चिंतन नहीं हो सकता, फ़ुरसत के बिना दिन में सपने नहीं देखे जा सकते। फ़ुरसत के बिना अच्छी-अच्छी, बारीक-बारीक, महान बातें नहीं सूझतीं।
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आज का प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति प्रेम का भूखा है।
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मेरा स्वभाव या सिद्धांत या प्रवृत्ति कुछ ऐसी है (मेरे ख़याल से जो शायद सही भी है) कि जो व्यक्ति साहित्यिक दुनिया से जितना दूर रहेगा, उसमें अच्छा साहित्यिक बनने की संभावना उतनी ही ज़्यादा बढ़ जाएगी। साहित्य के लिए साहित्य से निर्वासन आवश्यक है।
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