noImage

दयाबाई

1693 - 1773 | मेवात, हरियाणा

'चरनदासी संप्रदाय' से संबंधित संत चरणदास की शिष्या। कविता में सर्वस्व समर्पण और वैराग्य को महत्त्व देने के लिए स्मरणीय।

'चरनदासी संप्रदाय' से संबंधित संत चरणदास की शिष्या। कविता में सर्वस्व समर्पण और वैराग्य को महत्त्व देने के लिए स्मरणीय।

दयाबाई की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 77

आप मरन भय दूर करि, मारत रिपु को जाय।

महा मोह दल दलन करि, रहै सरूप समाय॥

  • शेयर

कायर कँपै देख करि, साधू को संग्राम।

सीस उतारै भुइँ धरै, जब पावै निज ठाम॥

  • शेयर

जो पग धरत सो दृढ़ धरत, पग पाछे नहिं देत।

अहंकार कूँ मार करि, राम रूप जस लेत॥

  • शेयर

मनमोहन को ध्याइये, तन-मन करि ये प्रीत।

हरि तज जे जग में पगे, देखौ बड़ी अनीत॥

  • शेयर

सूरा सन्मुख समर में, घायल होत निसंक।

यों साधू संसार में, जग के सहैं कलंक॥

  • शेयर

सोरठा 1

 

छप्पय 1

 

"हरियाणा" से संबंधित अन्य कवि

  • असद ज़ैदी असद ज़ैदी
  • पूनम अरोड़ा पूनम अरोड़ा
  • अतुलवीर अरोड़ा अतुलवीर अरोड़ा
  • गरीबदास गरीबदास
  • मनास मनास
  • सोमेश शुक्ल सोमेश शुक्ल