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अष्टभुजा शुक्‍ल

1954 | बस्ती, उत्तर प्रदेश

नवें दशक के महत्त्वपूर्ण कवि। अपने काव्य-वैविध्य और लोक-संवेदना के लिए उल्लेखनीय।

नवें दशक के महत्त्वपूर्ण कवि। अपने काव्य-वैविध्य और लोक-संवेदना के लिए उल्लेखनीय।

अष्टभुजा शुक्‍ल का परिचय

मूल नाम : अष्टभुजा शुक्‍ल

जन्म :बस्ती, उत्तर प्रदेश

अष्टभुजा शुक्ल का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के बस्ती ज़िले के दीक्षापार गाँव में 1954 में हुआ। वह अध्यापन के पेशे से संबद्ध हैं और इसके समानांतर उनका साहित्यिक सफ़र जारी है।

उनके अब तक तीन काव्य-संग्रह ‘पद-कुपद’, ‘चैत के बादल’ और ‘दुःस्वप्न भी आते हैं’ आ चुके हैं। उनका एक ललित-निबंध-संग्रह ‘मिठउआ’ भी प्रकाशित है। उनकी कविताएँ, ललित-निबंध और आलोचनात्मक लेख प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। नवें दशक के कवियों में वह एक महत्त्वपूर्ण नाम हैं। उन्हें केदारनाथ अग्रवाल और नागार्जुन की परंपरा से संलग्न ग्रामीण कवि कहा गया है जिनकी कविताओं में आम जीवन अपनी संपूर्ण संपन्नता में अभिव्यक्त होता है। उन्हें उनके काव्य-वैविध्य और लोक-संवेदना के लिए चिह्नित किया जाता है जहाँ उनकी कविता काव्यलक्षण सौंदर्य की धूरी बनाए रखते हुए लोकजीवन के सुख-दुःख के बीच डोलती है। उनकी कविताएँ एक ओर बाज़ारवाद और भूमंडलीकरण के दौर में आम लोकजीवन की सुधि लेती नज़र आती हैं तो दूसरी ओर उसके पक्ष में प्रगति के प्रत्येक चिह्न का उत्सव भी मनाती है।
   
उन्हें परिवेश सम्मान, राजा चक्रधर सम्मान, केदार सम्मान आदि से पुरस्कृत किया गया है।

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