अरुण आदित्य के बेला
प्रीति-प्रतीति की ध्यानावस्था में रची गई कविताएँ
रुस्तम के कविता-संग्रह ‘एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी’ की कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि यह प्रीति-प्रतीति की ध्यानावस्था में रची गई रचनाएँ हैं। यहाँ आदि से अनंत तक प्रेम की ख़ुशबू बिखरी हुई है। जड़ हो या च