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आज़मगढ़ के रचनाकार

कुल: 14

कवि और गद्यकार। खड़ी बोली हिंदी के प्रथम महाकाव्य 'प्रिय प्रवास' के रचनाकार।

मलयज

1935 - 1982

हिंदी के उल्लेखनीय कवि-आलोचक। अपनी डायरियों के लिए विशेष चर्चित, लेकिन अब अलक्षित।

अठारहवीं सदी के संत कवि। पदों में हृदय की सचाई और भावों की निर्भीक अभिव्यक्ति। स्पष्ट, सरल, ओजपूर्ण और मुहावरेदार भाषा का प्रयोग।

भारतेंदु युग के सुपरिचित लेखक। इनका स्मरण हिंदी साहित्य के प्रथम उत्थान का स्मरण है।

समय : 18वीं सदी। बावरी पंथ ग़ाज़ीपुर शाखा के संत गुलाल साहब के शिष्य। चमत्कार-विरोधी। नाम-स्मरण के सुगम पथ के राही।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक।

इस सदी में सामने आए हिंदी कवि-आलोचक और अनुवादक। जन संस्कृति मंच से संबद्ध।

नई पीढ़ी की कवयित्री-कथाकार। लोक-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय। 'इसे कविता की तरह न पढ़िए' शीर्षक से एक कविता-संग्रह प्रकाशित।

परंपरागत आदर्श पर विशेष बल देने वाली भारतेंदु युग की कवयित्री।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक।

सुपरिचित गीतकार और गद्यकार।

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