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सावन

savan

सावन के क़िस्से

बिछुड़ने की कहानियाँ

बारिश की बूंदें

यादों की परछाइयाँ

चंद मुलाक़ातें

और फिर तन्हाइयाँ

तन का भीगना

मन की रूसवाइयाँ

मेघों की गरजन

हँसती चले पुरवाइयाँ

किनारे की फिसलन

सड़कों पर वीरानियाँ

नदी का उफान

नावों पर सवारियाँ

रातों को टपाटप

सपनों की नादानियाँ

झींगुरों का शोर

दादुर की कव्वालियाँ

सीली-सी अटारी

धूप की अंगड़ाइयाँ।

दिन भादो के

मैं संजो रही ये

अनमोल दिन भीगे भादो के

तुम्हारे ही लिए।

उन्मादी हवाएँ

मूसलाधार वर्षा और उफनती नदियाँ

आँसुओं बारिश से

धुला साफ़-सुथरा मुखड़ा।

तुम्हारे ना

लौट आने की हठ के,

मुझे भूल जाने के दिन।

हरे-भरे पहाड़ों पर

टंगे रूई के फाहों से,

बादलों के पार छुपी

तुम्हारी मेरी

अजब-गजब कहानी

उसको भूलने के

विफल प्रयासों वाले दिन।

झील के किनारे

सिहरते भीगने के दिन

छाते को जान कर

घर भूल आना और

आकाश से बरसते

नेह से

अंतस भिगोने के दिन।

आशा छलती आई, निराशा

भुवनमोहनी सी इठलाती

झिरझिर बरसती बूंदों को

अकेले ही

गुनगुनाने के दिन।

मैं संजो रही

भादो के ये अनमोल दिन

तुम्हारे लिए।

स्रोत :
  • रचनाकार : महिमा श्रीवास्तव
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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