Font by Mehr Nastaliq Web

तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत पे यक़ीन कर

tu zinda hai to zindagi ki jeet pe yaqin kar

शंकर शैलेंद्र

अन्य

अन्य

शंकर शैलेंद्र

तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत पे यक़ीन कर

शंकर शैलेंद्र

और अधिकशंकर शैलेंद्र

    स्वर:रेख़्ता AI

    तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत पे यक़ीन कर

    अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।

    ये सुबह-ओ-शाम के रँगे हुए गगन को चूमकर

    तू सुन ज़मीन गा रही है कब से झूम-झूम कर!

    तू मेरा सिंगार कर तू मुझे हसीन कर।

    अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।

    ये ग़म के और चार दिन सितम के और चार दिन

    ये दिन भी जाएँगे गुज़र गुज़र गए हज़ार दिन

    कभी तो होगी इस चमन पे भी बहार की नज़र।

    अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।

    हमारे कारवाँ का मंज़िलों को इंतज़ार है

    ये आँधियों की बिजलियों की पीठ पर सवार है

    जिधर पड़ेंगे ये क़दम बनेगी एक नई डगर।

    हज़ार रूप धर के आई रात तेरे द्वार पर

    मगर तुझे छल सकी चली गई वो हार कर

    नई सुबह के संग सदा मिली तुझे नई उमर।

    अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अंदर की आग (पृष्ठ 93)
    • संपादक : रमा भारती
    • रचनाकार : शंकर शैलेंद्र
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2013

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY