तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत पे यक़ीन कर
tu zinda hai to zindagi ki jeet pe yaqin kar
शंकर शैलेंद्र
Shankar Shailendra
तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत पे यक़ीन कर
tu zinda hai to zindagi ki jeet pe yaqin kar
Shankar Shailendra
शंकर शैलेंद्र
और अधिकशंकर शैलेंद्र
तू ज़िंदा है तो ज़िंदगी की जीत पे यक़ीन कर
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।
ये सुबह-ओ-शाम के रँगे हुए गगन को चूमकर
तू सुन ज़मीन गा रही है कब से झूम-झूम कर!
तू आ मेरा सिंगार कर तू आ मुझे हसीन कर।
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।
ये ग़म के और चार दिन सितम के और चार दिन
ये दिन भी जाएँगे गुज़र गुज़र गए हज़ार दिन
कभी तो होगी इस चमन पे भी बहार की नज़र।
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।
हमारे कारवाँ का मंज़िलों को इंतज़ार है
ये आँधियों की बिजलियों की पीठ पर सवार है
जिधर पड़ेंगे ये क़दम बनेगी एक नई डगर।
हज़ार रूप धर के आई रात तेरे द्वार पर
मगर तुझे न छल सकी चली गई वो हार कर
नई सुबह के संग सदा मिली तुझे नई उमर।
अगर कहीं है स्वर्ग तो उतार ला ज़मीन पर।
- पुस्तक : अंदर की आग (पृष्ठ 93)
- संपादक : रमा भारती
- रचनाकार : शंकर शैलेंद्र
- प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
- संस्करण : 2013
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