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प्रीति-रीति

priti riti

बुद्धिनाथ झा

बुद्धिनाथ झा

प्रीति-रीति

बुद्धिनाथ झा

और अधिकबुद्धिनाथ झा

    जानि किए नञि गाम अबै छै, प्रीतम नै छै, पाथर छै

    आइ कपोलक भोजपत्रपर, लीखल नोरक आखर छै।

    दऽ सेनुर दिल्ली जा बैसलै, तिल-तिल ताड़ लगै छै

    फगुनओहटि मास डकूबा, मास अषाढ़ लगै छै

    मधुबिकनी बिढ़नी रहि-रहि, उनटे गीत गबै छै

    स्मृति विलक्षण, सोझाँ सदिखन, आओर उताप बढ़े छै।

    बल जकर सम्बल जीवन केर, जाकऽ ककर चाकर छै

    आइ कपोलक भोजपत्रपर लीखल नोरक आखर छै॥

    सूगा पोसक सऽख मुदा से, पिंजड़ामे धऽ राखत

    राम-राम रटते कत्ते ओ, गाड़ि किए नञि भाखत

    जखन फतिङा आँखिक सोझा, नभमे जा बिहरै छै

    विरही आँखिक पानि तखन, कोंढ़क तरसँ उमड़ै छै।

    पाती की छाती जा गडतै, पाँतिए जकरा बाँतर छै

    आइ कपोलक भोजपत्रपर, लीखल नोरक आखर छै॥

    मधुश्रावणी तीतल बीतल, आओर कोजागरा आयत

    जड़ जड़ाउर तँ अयबे करतै, ओहो अहिना जायत

    पूसक जाड़ हाड़ सटनहि कि, जौं नहि पहु हो पासे

    अपन आँगन अछि अन्हार, बरू ऊगथु चान अकासे।

    पूनम केर दुधिया गाबिसपर, उझिलल मोसिक गागर छै

    आइ कपोलक भोजपत्रपर, लीखल नोरक आखर छै॥

    —किए पीड़ उद्रेक व्यग्रता(?) कष्टक काल कटै छी

    खन माधव राधा भऽ कौखन, अनुखन संग रहै छी

    बिनु माधव मधुकुण्ड महौदधि, सेहो छुच्छे लागत

    नेह माधवक आस, अनत दुःख तैयो तुच्छे लागत।

    मिलन आस विश्वासक आगाँ, कि कुंकुम, कि काजर छै

    प्रीतिक जोर नोर भऽ टघरय, कि बिजुरी, कि बादर छै॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : अक्षर निर्क्षर (मैथिली काव्य-संग्रह) (पृष्ठ 98)
    • रचनाकार : बुद्धिनाथ झा
    • प्रकाशन : क्रिएटिव कैम्पस प्रकाशन, हैदराबाद
    • संस्करण : 2015

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