मोरे सँइया के ऊँचा मोहार सखिया
more saniya ke uncha mohar sakhiya
परवाना प्रतापगढ़ी
Parwana Pratapgarhi
मोरे सँइया के ऊँचा मोहार सखिया
more saniya ke uncha mohar sakhiya
Parwana Pratapgarhi
परवाना प्रतापगढ़ी
और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी
बलम बहुतै करैं मोर दुलार सखिया,
मोर ननदी बहारै दुआर सखिया,
सास रानी हमका जौ भरि लावैं पनिया,
देखि जरि जाय मोर बैरन जेठनिया,
मोरे सँइया कै ऊँचा मोहार सखिया।
बलम बहुतै करैं...
बरसै बदरिया तौ भीगे अँचरवा,
छुटि जाय नैनन कै हमरे कजरवा,
मोर देवरा गटइया कै हार सखिया
बलम बहुतै करें...
बहुतै दिना से न आये सजनवा,
खनकै कलइया के हमरे कँगनवा,
उड़िगै अँखिया कै निंदिया हमार सखिया,
बलम बहुतै करैं...
जब से गये मोर पिया परदेसवा,
भेजे न चिठिया न कउनो सन्देसवा,
केहू लागै न हमरे गोहार सखिया,
बलम बहुतै करैं...
अबकै गये कब अइहैं सजनवा,
रहिया निहारैं मोर दुइनौ नयनवा,
भइले परवाना जिया से पियार सखिया,
बलम बहुतै करैं...
- पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 15)
- रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
- प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
- संस्करण : 2013
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