Font by Mehr Nastaliq Web

मोरे सँइया के ऊँचा मोहार सखिया

more saniya ke uncha mohar sakhiya

परवाना प्रतापगढ़ी

परवाना प्रतापगढ़ी

मोरे सँइया के ऊँचा मोहार सखिया

परवाना प्रतापगढ़ी

और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी

    बलम बहुतै करैं मोर दुलार सखिया,

    मोर ननदी बहारै दुआर सखिया,

    सास रानी हमका जौ भरि लावैं पनिया,

    देखि जरि जाय मोर बैरन जेठनिया,

    मोरे सँइया कै ऊँचा मोहार सखिया।

    बलम बहुतै करैं...

    बरसै बदरिया तौ भीगे अँचरवा,

    छुटि जाय नैनन कै हमरे कजरवा,

    मोर देवरा गटइया कै हार सखिया

    बलम बहुतै करें...

    बहुतै दिना से आये सजनवा,

    खनकै कलइया के हमरे कँगनवा,

    उड़िगै अँखिया कै निंदिया हमार सखिया,

    बलम बहुतै करैं...

    जब से गये मोर पिया परदेसवा,

    भेजे चिठिया कउनो सन्देसवा,

    केहू लागै हमरे गोहार सखिया,

    बलम बहुतै करैं...

    अबकै गये कब अइहैं सजनवा,

    रहिया निहारैं मोर दुइनौ नयनवा,

    भइले परवाना जिया से पियार सखिया,

    बलम बहुतै करैं...

    स्रोत :
    • पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 15)
    • रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
    • प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
    • संस्करण : 2013

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY