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मैने चाहा है कि तुम

maine chaha hai ki tum

मुक्ति प्रिया

मुक्ति प्रिया

मैने चाहा है कि तुम

मुक्ति प्रिया

और अधिकमुक्ति प्रिया

    मैने चाहा है कि तुम मुझे अविरल प्रेम करो

    गंगा जैसे सदियों से अविरलता से बहती आई है

    जैसे गंगा का पानी मुक्तिदायिनी है

    ठीक उसी तरह तुम्हारा प्रेम मेरा मुक्तिधाम हो

    मैने चाहा है कि तुम अंतरप्रेम करो

    ऐसा अंतरप्रेम एक माँ अपने शिशु से करती है

    जैसे माँ सींचती है अपने शिशु के सपनों को

    ठीक उसी तरह तुम मुझे सृजित करो

    मैंने चाहा है कि तुम मुझे परम प्रेम करो

    जैसा भरत ने राम से किया है

    भरत का प्रेम राम की महानता का आधार है

    ठीक वैसे ही तुम मेरे प्रेममय जीवन का आधार बनो

    मैंने चाहा है कि तुम मुझसे निर्भीक प्रेम करो

    जैसा गाँधी ने भारत से किया है

    इस प्रेम में सत्य और अहिंसा मेरे साथी बनकर

    मुझे स्वत्रंता रखे

    मैंने चाहा है कि तुम मुझसे अति प्रेम करो

    जैसा गोपियों ने कृष्ण से किया है

    ठीक राधे की तरह तुम मुझे सब मे मिलो

    जहाँ सिर्फ़ प्रेम का रास हो।

    स्रोत :
    • रचनाकार : मुक्ति प्रिया
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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