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जोड़ा मन्दिर

joDa mandir

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

जोड़ा मन्दिर

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    आनि सकैत छथि

    तोड़िक' अकाससँ तरेगन

    उगा सकैत छथि

    तरहत्थीपर गुलाब

    पहाड़ काटि निकालि सकैत छथि जलधार

    ताजमहल सेहो बनबा सकैत छथि

    आरामसँ

    कोनो स्त्रीक प्रेममे

    तोड़ि सकैत छथि

    सभटा रीत-रेवाज, परम्परा

    कि मर्यादाक बन्हन

    बदलि सकैत छथि स्वयंकेँ

    अपना प्रियतम लेल

    हुनका नहि रोकि सकैत छनि

    कोनो वर्जना, कोनो लक्ष्मण-रेखा

    पार क’ सकैत छथि सभटा बाधा

    ककरो मातल आँखिमे देखि

    क’ सकैत छथि

    सभ किछ

    मुदा!

    नहि द' सकैत छथि

    बिछौनापर पड़ल बीमार मायकेँ

    एक गिलास पानि

    नहि द' सकैत छथि

    उकासी करैत पिताक

    पीठपर हाथ

    नहि बैसि सकैत छथि

    बाबा-मैंञा लग कौखन

    हुनका लग नहि छनि पलखति

    ओह जँ रहितथि जीबैत आइ

    'बाबा' यात्री जी

    पुछितियनि हुनकासँ

    कोन नवतुरियाकेँ कहने रहक

    आबय लेल आगाँ

    कतय ताकू ओहि नवतुरिया सभमे

    कोनो 'महतो जी' सन पुत्र

    जे बनाबय फेरसँ

    एकटा 'जोड़ा मन्दिर'

    अपन माता-पिताक मधुर स्मृतिमे!

    स्रोत :
    • पुस्तक : ई नहि थिक हमर प्रार्थना (पृष्ठ 26)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2020

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