हार गयी पिया तोहे रात-दिन पुकार के
haar gayi piya tohe raat din pukar ke
परवाना प्रतापगढ़ी
Parwana Pratapgarhi
हार गयी पिया तोहे रात-दिन पुकार के
haar gayi piya tohe raat din pukar ke
Parwana Pratapgarhi
परवाना प्रतापगढ़ी
और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी
थकि गइले नैन मोर रहिया निहार के,
हार गयी पिया तोहे रात-दिन पुकार के,
तुम बिन हमरा अँगनवा न सोहै,
देहिया पे कौनो गहनवा न सोहै,
बीत न जाये सब दिन मोरे बहार के
हार गयी पिया...
प्यासा है मन मोर तरसे नजरिया,
जाने कब पिया मोर लेइहैं खबरिया,
काव तुहैं मिला मोर बगिया उजार के
हार गयी पिया...
केतनौ अँजोर करैं चमकै बिजुरिया,
नीक नही लागे हमै चाँद कै अँजोरिया,
बाट जोही हम तोहरी दीप बार-बारके
हार गयी पिया...
मोहन मुरारी मोर मनसा फुराय दा,
बिछड़ा है हमसे मोर हंसा मिलाय दा,
माँगत हूँ भीख तोसे अँजुरी पसार के
हार गयी पिया...
तोहरे सहरवा पे हमरा जमनवा,
दीप के अँजोरिया म जिये परवनवा,
चन्दा लइ आवातनी धरती उतार के
हार गयी पिया...
- पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 31)
- रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
- प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
- संस्करण : 2013
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