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आज़ादी का सूरज चमका शहरों के आकाश में,

azadi ka suraj chamka shahron ke akash mein,

उदय प्रताप सिंह

उदय प्रताप सिंह

आज़ादी का सूरज चमका शहरों के आकाश में,

उदय प्रताप सिंह

और अधिकउदय प्रताप सिंह

    गाँव पड़े हैं अभी ग़ुलामी के पिछले इतिहास में।

    फूल-कली ने ज़हर खा लिया तंग हुए महंगाई से

    हँसती रही तिज़ोरी काली उन पर बेशरमाई से

    सूदखोर ले गया दुल्हन का कंगन खोल कलाई से

    गायों से ज़्यादा डरता है निर्धन आज क़साई से

    मन करता है आग लगा दें ऐसे व्यर्थ विकास में

    उत्पादक का शव ढँकने की क्षमता नहीं कपास में।

    सभ्य देश की खबरें पढ़कर आती शर्म निगाहों पर

    आदर्शों की लाश सड़ रही सरेआम चौराहों पर

    कृष्ण बढ़ाते नहीं चीर अब द्रौपदियों की आहों पर

    उल्टा परदा डाल रहे हैं नटवरलाल गुनाहों पर

    सिवा लेखनी, दुखी नहीं है कोई इस आभास में।

    क्या होगा यदि अपनी चिंतन पूँजी बची न पास में।

    हिंदी, उर्दू साथ रही आज़ादी की क़ुरबानी में

    अशफाक़उल्ला , भगतसिंह ने जोड़े पृष्ठ कहानी में

    वतन शमाँ के परवाने जलते थे भरी जवानी में

    तब अंग्रेज़ गया भारत से आग लगाकर पानी में

    आधी सदी बीतने आई तब से इसी प्रयास में

    कमी न आई हैवानों के तनिक लहू की प्यास में

    प्रतिभा बिकती है विदेश में सत्य चुना दीवारों में

    अपराधी वैभव लिखवाता अपना नाम सितारों में

    सच की करो प्रतिष्ठा यारो, उपवन के व्यवहारों में

    वर्ना अंतर नहीं रहेगा, पतझर और बहारों में

    फुलवारी का ध्यान नहीं है शोभा और सुवास में

    माली बीज बिगाड़ रहे हैं विग्रह और समास में

    चिंता नहीं देश की कोई करता बड़ा विषाद है

    और अगर कोई करता है तो केवल अपवाद है

    पता नहीं किस ओर जा रहा ये रथ बड़ा प्रमाद है

    लक्ष्य कहाँ है इस पर सारथियों में वाद-विवाद है

    युवा चेतना दबी हुई है कुंठा में, संत्रास में

    क्या हम मर जाएँगे जीवित रहने के अभ्यास में!

    किस पर दोष धरें इन सबका, किसकी ये नादानी है

    सच पूछो तो अपने कर्मों की ही रामकहानी है

    वही किसानी, वही गिरानी, वो ही छप्पर-छानी है

    तन पर नहीं सूत का धागा, उस पर हवा हिमानी है

    आधा देश अश्रु में डूबा आधा भोग-विलास में।

    इसकी सजा मिलेगी अगली पीढ़ी के इजलास में।

    आज़ादी का सूरज चमका शहरों के आकाश में

    गाँव पड़े हैं अभी ग़ुलामी के पिछले इतिहास में।

    स्रोत :
    • रचनाकार : उदय प्रताप सिंह
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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