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याद में तहरा

yaad mein tahra

अशोक द्विवेदी

अशोक द्विवेदी

याद में तहरा

अशोक द्विवेदी

और अधिकअशोक द्विवेदी

    याद में तहरा बनल धुन के गुनगुनाहट बा

    गौर से देखऽ पतइयन में सुगबुगाहट बा

    हवा से पर्दा हिलल, हमके लगल तूँ अइलऽ

    आँखि में बिजुरी उगल, ओठे थरथराहट बा

    उड़ के आइल बा महक फेरु उहे पहिचानल

    कान पर तहरे गरम साँस के गरमाहट बा

    हिलल डाढ़ि, गिरल बा जमीन पर पतई

    उड़ल काग बुला, खाली कँपकँपाहट बा

    तहरा बिन घर-दुआर अब उचाट बा लागत

    फेंड़ थथमल बा, हवा नइखे, उजबुजाहट बा

    निबुस चुकल बा अबहियें किरिस-किरिस बदरा

    फेरु बरिसे के कसक अउरी छटपटाहट बा

    रात खरकत बा, दीठि बाटे सून चउकट पर

    कान दरवाजा प' आपत तहार आहट बा

    स्रोत :
    • पुस्तक : फूटल किरिन हजार (पृष्ठ 124)
    • रचनाकार : अशोक द्विवेदी
    • प्रकाशन : पाती प्रकाशन, बलिया
    • संस्करण : 2003

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