समय खातिर अभी समय कहाँ मिलत बा
samay khatir abhi samay kahan milat ba
समय खातिर अभी समय कहाँ मिलत बा
समय के इन्तजार में अभी समय बीतत बा
साँस के आस में, साँस फूलावत बा लोग
आदमी के मिलल साँस रोजरोज रीतत बा
लोग बात करे दोसर से, अपन बात सुनेला
मिलजुल के दुनु तीसर के बात छीलत बा
होश खातिर, बारबार बेहोस होजाला लोग
बिन पीअलें कुछ लोग नशा में हिलत बा
लोग बेचैन बा इहाँ पर, चैन के तलाश में
मन में अब चैन के फूल कहाँ खिलत बा
- पुस्तक : बेचैन संदेश (भोजपुरी गजल-संग्रह) (पृष्ठ 18)
- रचनाकार : शिव संदेश
- प्रकाशन : भोजपुरी प्रज्ञा प्रतिष्ठान, काठमांडू, नेपाल
- संस्करण : 2024
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.