तीत बस तीत ना मिठास बा
teet bas teet na mithas ba
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
तीत बस तीत ना मिठास बा
teet bas teet na mithas ba
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
तीत बस तीत ना मिठास बा।
लाखा कहलो पर मन उदास बा।
जिनगी जीए के लूर जानी ले।
रोजे लागल नया उदबास बा॥
दरद बाँटी त भला के लीही।
केहु बिलमी, कहाँ सँवास बा॥
लोग चिचियात बा मचाने पर।
लगहीं चुल्हा पड़ल उपास बा॥
उनका आँखिन में छोह के सागर।
हमरा गर में भरल तरास बा॥
कवनो डाईन हवा के मंतर से।
भीड़ नाचत सभे हतास बा॥
कोना-कोना अंजोर दुबकल बा।
राहे राहे खड़ा झपास बा॥
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 19)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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