शहर खौफ़ में बा, नज़ारा दबल बा
shahr khauf mein ba, nazara dabal ba
शहर खौफ़ में बा, नज़ारा दबल बा,
लगल आग कइसन, सहारा दबल बा।
निशाना मिटल दोस्त बा दूर हम से,
बहल अश्क बहुते, किनारा दबल बा।
करीं लाख कोशिश, समय देत धोखा,
भइल रात करिया, सितारा दबल बा।
छुपाईं नज़र के बहत शोख काजर,
मगर फैल जाला, शरारा दबल बा।
कहाँ दर-ब-दर हम भटक रोज जानी,
गिरेनीं-उठेनीं, इशारा दबल बा।
- पुस्तक : गुजर रहल बा जिन्दगी (कविता-संग्रह) (पृष्ठ 107)
- रचनाकार : अनीता साह
- प्रकाशन : ओरिएन्टल पब्लिकेशन हाउस प्रा. लि., काठमांडू, नेपाल
- संस्करण : 2025
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