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ठोर सीने अपन चुप रहल नहि भेलै

thor sine apan chup rahal nahi bhelai

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

ठोर सीने अपन चुप रहल नहि भेलै

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    ठोर सीने अपन चुप रहल नहि भेलै

    फूसि ककरो प्रशस्ति लिखल नहि भेलै।

    छल सामर्थ्य नहि से एहन बात नहि

    छोड़ि साहित्य, सत्ता गहल नहि भेलै।

    जीबि रहलै बहुत लोक मुरदा जकाँ

    संग मुरदाक हमरा मरल नहि भेलै।

    नाम जिनकर शहादतिमे उपरे रहै

    फूसियोमे एको दिन जहल नहि भेलै।

    गीत, कविता, गजल, छंद सभटा पढ़ल

    चारि पाँति सिनेहक पढ़ल नहि भेलै।

    ठोर पर, जीह पर, मोनमे मैथिली

    आन भाषाक आँगुर गहल नहि भेलै।

    स्रोत :
    • पुस्तक : तेँ ओ बजलैए (पृष्ठ 21)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2023

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