पता ना ई दुनिया कवन चला रहल बा
pata na ii duniya kavan chala rahal ba
पता ना ई दुनिया कवन चला रहल बा
कभी रोआ रहल बा, कभी हँसा रहल बा
मिलेला केकरा से, ई व्याकुल बा रातदिन
नदी के जइसन जिनगी के बहा रहल बा
बाहरी दुनिया छोड़ के भीतरी दुनिया में
खोजे खातिर बारम्बार के जगा रहल बा
समझ ना आवे अब कवन रास्ता पकड़ीं
कभी बोला रहल बा कभी भगा रहल बा
धर्म आ विज्ञान के घोचपेंच में अझुराइल
जाने शिव के मन काहे डगमगा रहल बा
- पुस्तक : बेचैन संदेश (भोजपुरी गजल-संग्रह) (पृष्ठ 1)
- रचनाकार : शिव संदेश
- प्रकाशन : भोजपुरी प्रज्ञा प्रतिष्ठान, काठमांडू, नेपाल
- संस्करण : 2024
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