खाई बाटे गहिर भरके पाटे समय
khai bate gahir bharke pate samay
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
खाई बाटे गहिर भरके पाटे समय
khai bate gahir bharke pate samay
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
खाई बाटे गहिर भरके पाटे समय।
चोट पर फाहा रुई के साटे समय॥
कहवाँ बालू मिलल, कहवाँ भेंटल रतन,
बेरा अइला पर चुन-चुन के छाँटे समय॥
चंदा सूरुज पर करिखा सभे लेप दे,
दाग लगलो पर हँस-हँस के काटे समय॥
बेकहल मन हो, मुह पर ना होखे लगाम,
बख्त गइला पर सभका के डाँटे समय॥
पार जाये के बा होखीं तइयार अब,
नाव बाँधल करी चलके घाटे समय॥
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 48)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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