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दइबा बाम भइल

daiba baam bhail

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

    दइबा बाम भइल।

    छांह घाम भइल॥

    दिन भइल ना भइल,

    भोरहीं शाम भइल॥

    ठंटरी गठरी में,

    रोटी चाम भइल॥

    जिनगी मउअत बा,

    जिअल बदनाम भइल॥

    प्रेम हड़ताल पर।

    हिरदया जाम भइल॥

    राउर अराहल सभ,

    काम बेकाम भइल॥

    फाड़ल पन्ना 'सतीश',

    टुकी हर ठाम भइल॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 47)
    • रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
    • प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
    • संस्करण : 1996

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