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जिनगी बहुत मुश्किल डगर, बाकिर चलत इंसान बा

jingi bahut mushkil Dagar, bakir chalat insaan ba

अनीता साह

अनीता साह

जिनगी बहुत मुश्किल डगर, बाकिर चलत इंसान बा

अनीता साह

और अधिकअनीता साह

    जिनगी बहुत मुश्किल डगर, बाकिर चलत इंसान बा,

    बा घाम चाहे छेह पथ में मेहनत पहचान बा।

    कुर्सी बनल बा शान, खेतन के मजुर दबते रहल,

    मुड़ पर सजल गमछा भले, ओकर कबो ना मान बा।

    वक्त अइसन बा शिकारी, हर कदम पर ध्यान बा,

    काम नेकी भा बदी के, ओकरा सब ज्ञान बा।

    आँख में मत झोंकि धूरा, बेइमानी बा गलत,

    लोभ धोखाधड़ी में हर समय अपमान बा।

    खोद के गरहा बुझीं रउए फँसब जंजाल में,

    कह रहल गीता सदा से, त्याग में सम्मान बा।

    के बचल बा रंक राजा, गति भइल सबके इहाँ,

    अंत सबका एक जइसन, जर गइल सब शान बा।

    भूखे रहत रोटी घटल तब नौकरी खोजी भइल,

    जे नून रोटी दवा कपड़ा मिलो तब जान बा।

    नीमन रहे व्यवहार भी, संबंध में सद्भाव हो,

    बतिया किताबन में लिखल जे सीख ली ज्ञान बा।

    खाली अमीरी बात में, कुछ दान कइले भी चलीं

    गीता कहेला दोसरा ला भी जियल सम्मान बा।

    स्रोत :
    • पुस्तक : गुजर रहल बा जिन्दगी (कविता-संग्रह) (पृष्ठ 109)
    • रचनाकार : अनीता साह
    • प्रकाशन : ओरिएन्टल पब्लिकेशन हाउस प्रा. लि., काठमांडू, नेपाल
    • संस्करण : 2025

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