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चमक दमक में

chamak damak mein

अशोक द्विवेदी

अशोक द्विवेदी

चमक दमक में

अशोक द्विवेदी

और अधिकअशोक द्विवेदी

    चमक दमक में, इहाँ सादगी मिलत नइखे

    हवा चलत बा, मगर ताजगी भरत नइखे

    एह सुघराई में लागत बा कहाँ रूप के आँच

    अन्हार मन में कहीं रोशनी बरत नइखे

    उड़ रहल बाटे कबूतर चिल्होर का साथे

    जुग नया बाटे मगर दोस्ती जमत नइखे

    महक से अउँज उठे साँस-साँस में भरि जाव—

    इहाँ फुलवारी में अब कली खिलत नइखे

    हादसा कब कहाँ घटि जाव, कहाँ बा मालूम

    कौनो अनहोनी का डर से, खुशी उगत नइखे

    कहाँ बा इतमिनान, देख के महसूस करीं—

    अतना जल्दी बा कि मिललो खुशी रुचत नइखे

    खउफ का मारे हिलत नइखे इहाँ पतई ले

    दूब मैदान के अब चाँदनी चरत नइखे

    स्रोत :
    • पुस्तक : फूटल किरिन हजार (पृष्ठ 154)
    • रचनाकार : अशोक द्विवेदी
    • प्रकाशन : पाती प्रकाशन, बलिया
    • संस्करण : 2003

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