चाँद कइले सिंगार बा कि आव
chaand kaile singar ba ki aav
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
चाँद कइले सिंगार बा कि आव
chaand kaile singar ba ki aav
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
चाँद कइले सिंगार बा कि आव।
हमरा तोहरा में पिआर बा कि आव
ऊ नशा का जे पीके चढ़ल बा,
बिनु पीअले खुमार बा कि आव॥
चांदनी सभ लुटवलस इँजोरा
काहे तबहुँ अंधार बा कि आव॥
साथ जीए-मुँए के बा वादा
राह छेकले कटार बा कि आव॥
झूठ उपहार भावन के लेके
सबरी मन कबसे खाड़ बा कि आव॥
प्रेम में बाँट-बखरा बा कइसन
के दो खींचले दीवार बा कि आव॥
बाढ़ आइल लहू के नदी में
मउत नाचे गुहार बा कि आव॥
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 31)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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