बोलऽ जनि बस निहारऽ, हशारा मिली
bolऽ jani bas niharऽ, hashara mili
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
बोलऽ जनि बस निहारऽ, हशारा मिली
bolऽ jani bas niharऽ, hashara mili
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
बोलऽ जनि बस निहारऽ, हशारा मिली
जिनगी में छिन जिए के सहारा मिली॥
मात मउअत के देहब हरेक ठाँव पर
फेरू जीए के मोका दोबारा मिली॥
चोट खा के ना मनके घवाहिल करऽ
इचको हटब त तेगा दुधारा मिली॥
आन्ही में बन के दिअना जरब राह में
हर कदम पर समय के सितारा मिली॥
तूं भले भूल जा साथ के बात के
साथी बिनु जग में कइसे किनारा मिली॥
ई भरोसा पर अबले जीअत बा 'सतीश'
केहू जानों से बढ़ के पिआरा मिली॥
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 3)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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