बाट बाधित पहाड़े छै पाटल जखन
baat badhit pahaDe chhai patal jakhan
बाट बाधित पहाड़े छै पाटल जखन
सीयत दरजी के आकासे फाटल जखन।
आइ अंगा फकीरक घरा अछि बनल
सौंसे चेफड़ी समस्येक साटल जखन।
द्वेष, ईर्ष्या, घृणा, उर, तनावक लहरि
एक दोसरसँ दूध जकाँ फाटल जखन।
गर्म मौसम बनल लपलपाबैछ जीह
प्यास छै शोनिते केर जागल जखन।
लीखपर ने अपन वियतनामे रहल
देश हमरो वैह लीख लागल जखन।
- पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 6)
- रचनाकार : कलानन्द भट्ट
- प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
- संस्करण : 1983
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