अइसन बिगड़ल हवा के असर देख लीं
aisan bigDal hava ke asar dekh leen
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
अइसन बिगड़ल हवा के असर देख लीं
aisan bigDal hava ke asar dekh leen
Satishwar Sahay Verma 'Satish'
सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
और अधिकसतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
अइसन बिगड़ल हवा के असर देख लीं।
झूठ जिनगी के बाटे सफर देख लीं॥
पिआर के गाँव में पिआर बांटल रहीं
आजु बदलल बा उनकर नजर देख लीं।
आँखि में बा चमक, ओठ मुसकी भरल
बात में लटपटाइल जहर देख लीं।
साँप बहिरा बनल लोग ससरत फिरे
जग बनल नाग के बा नगर देखलीं।
हर तिथि भर महीना जोखाते रहल
बईठल बनिया बा आठो पहल देख लीं।
चौमुहानी पर ठमकल खड़ा बा सभे
डोर फाँसी के लटकल डगर देख लीं।
जिनगी देके उ जिनगी जीअल ना 'सतीश'
मन समुंदर में लोटल लहर देख लीं।
- पुस्तक : जल के धारा में दीयना (भोजपुरी गजल-संग्रह) (संकलन : अम्बदत्त गुंजन) (पृष्ठ 18)
- रचनाकार : सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’
- प्रकाशन : भारतीय भोजपुरी साहित्य परिषद, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1996
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