आसे आस पर निराशा हो गइल जिनगी
aase aas par nirasha ho gail jingi
आसे आस पर निराशा हो गइल जिनगी
लोग खातिर ई तमाशा हो गइल जिनगी
नाचत बानी दोसरा के खातिर आजकल
चिरई फसावेवाला लासा हो गइल जिनगी
कोशिश पर कोशिश करत रहेनी हरदम
मामा शकुनी के पासा हो गइल जिनगी
दूर से सुन्दर लागेला लोग के आवरण
फूटल चीनी के बतासा हो गइल जिनगी
सबकोई मतलब अनुसार अर्थ लगावेला
आदमी के अलग भाषा हो गइल जिनगी
बातबात में अलग होला वर्णन संदेश के
हर क्षण एगो परिभाषा हो गइल जिनगी
- पुस्तक : बेचैन संदेश (भोजपुरी गजल-संग्रह) (पृष्ठ 46)
- रचनाकार : शिव संदेश
- प्रकाशन : भोजपुरी प्रज्ञा प्रतिष्ठान, काठमांडू, नेपाल
- संस्करण : 2024
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