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नैना झरे हरसिंगार

naina jhare harsingar

भोलानाथ गहमरी

भोलानाथ गहमरी

नैना झरे हरसिंगार

भोलानाथ गहमरी

और अधिकभोलानाथ गहमरी

    पात-पात दुअरे के महुआ फुलाइ गइल

    अँगना फुलेला कचनार।

    कि हो मोरे अँगना फुलेला कचनार…

    हमरी अटरिया पर चाँदनी थिरके,

    चाँदनी थिरके पायलिया झनके,

    नैना झरे हरसिंगार।

    कि हो मोरे…

    मोरे पिछवरिया रे घनी बंसवरिया,

    घनी बंसवरिया से जुड़ली उमिरिया,

    पोरे-पोरे हो गइली भार।

    कि हो मोरे…

    तूँ परदेसिया मरम बूझे,

    मरम बूझे कहाँ जा के उलझे,

    मुरझे ना सपना के हार।

    कि हो मोरे…

    लहरेला चउरा पर तुलसी के पाती,

    तुलसी के पाती या असरा के थाती,

    पूजा बा मन के पियार।

    कि हो मोरे…

    स्रोत :
    • पुस्तक : लोक रागिनी (पृष्ठ 215)
    • रचनाकार : भोलानाथ गहमरी
    • प्रकाशन : रागिनी प्रकाशन, गाजीपुर
    • संस्करण : 1995

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