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छुच्छे मेघक अबरजात

chhuchchhe meghak abarjat

अशोक कुमार मेहता

अशोक कुमार मेहता

छुच्छे मेघक अबरजात

अशोक कुमार मेहता

और अधिकअशोक कुमार मेहता

    छुच्छे मेघक अबरजात मुदा

    बुन्नक नहि कोनो आस

    अखाढ़ आब तऽ बीति रहल

    सुक्खल सभतरि चास

    सजनी! मन धरती सनक अभागल।

    झिसिआयल फुहिआयल दिनभरि

    बरिसल नहि मेह

    साँझक बेला उनटल पुरिबा

    उड़ि गेल बादरि गेह

    सजनी! मन परती सनक सोगायल।

    आइ भोरेसँ रहि-रहि झमकए

    छपछप आङन पानि

    गाछ-पात मगन भऽ रमकए

    बदलल मौसम बानि

    सजनी! मन प्रकृतिक सनक सोहागल।

    स्रोत :
    • पुस्तक : पंछी बनी गगन केर… (मैथिली गीत-संग्रह) (पृष्ठ 63)
    • रचनाकार : अशोक कुमार मेहता
    • प्रकाशन : अनुप्रास प्रकाशन, मधुबनी
    • संस्करण : 2024

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