रूद्राणी प्रियदर्शनी के बेला
पत्र : वियोगिनी ठाकुर के लिए : ‘अश्लीलता’ के नए आयाम
प्रिय वियोगिनी ठाकुर जी, आपके लिखे ‘अश्लील स्थितियों में फँसना’ पढ़ते हुए कुछ बातें मन में आईं। लगा कि आपसे उन पर बात की जानी चाहिए। आपके लिखे प्रसंगों में अश्लीलता, स्त्री-देह, सामाजिक पूर्वाग्रह