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मर्यादा पर बेला

15 मई 2026

मैंने तो न्याय माँगा था, आपने मनोरंजन बना दिया

मैंने तो न्याय माँगा था, आपने मनोरंजन बना दिया

कभी-कभी मैं यह भूल जाती हूँ कि यह इक्कीसवीं सदी है और हम ‘स्क्रीन’ में जी रहे हैं। हमारा पूरा जीवन एक ‘स्क्रीन’ के आस-पा

05 अप्रैल 2025

शोक स्थायी है

शोक स्थायी है

मैं कितना अपढ़ और अहंकारी हुआ जाता हूँ, इसका भान भी पढ़ने और जीने से ही आता है। आजकल ऐसा लगता है कि मैं अपने आप को ही