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निमित्त पर उद्धरण

कार्य, कारण का व्यक्त रूप है।

स्वामी विवेकानन्द

कार्य और कारण में कोई मौलिक भेद नहीं होता।

स्वामी विवेकानन्द

कारण का नाश होकर कार्य अर्थात् फल का उदय होता है, फिर कार्य सूक्ष्मभाव धारण कर, बाद के कार्य का कारणस्वरूप होता है।

स्वामी विवेकानन्द

हर चीज़ के पीछे के कारण को तलाशना हमेशा ज़रूरी नहीं होता, क्योंकि हर वजह बेबुनियाद होती है। कारण, एक निश्चित नज़रिये से ही कारण दिखाई देता है।

लास्ज़लो क्रास्ज़्नाहोरकाई

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