सुंदरदास के 10 प्रसिद्ध और सर्वश्रेष्ठ दोहे

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सुंदर मन मृग रसिक है, नाद सुनै जब कांन।

हलै चलै नहिं ठौर तें, रहौ कि निकसौ प्रांन॥

सुंदरदास

बहुत छिपावै आप कौं, मुझे जांगै कोइ।

सुंदर छाना क्यौं रहै, जग में जाहर होइ॥

सुंदरदास

सुंदर बिरहनि अति दुखी, पीव मिलन की चाह।

निस दिन बैठी अनमनी, नैननि नीर प्रबाह॥

सुंदरदास

सुंदर दुर्जन सारिषा, दुखदाई नहिं और।

स्वर्ग मृत्यु पाताल हम, देखे सब ही ठौर॥

सुंदरदास

जो कोउ मारै बान भरि, सुंदर कछु दुख नांहिं।

दुर्जन मारै बचन सौं, सालतु है उर मांहिं॥

सुंदरदास

देह आप करि मांनिया, महा अज्ञ मतिमंद।

सुंदर निकसै छीलकै, जबहिं उचेरे कंद॥

सुंदरदास

यौं मति जानै बावरे, काल लगावै बेर।

सुंदर सब ही देखतें, होइ राख की ढेर॥

सुंदरदास

राम नाम शंकर कह्यौ, गौरी कौं उपदेस।

सुंदर ताही राम कौं, सदा जपतु है सेस॥

सुंदरदास

सुंदर ग़ाफ़िल क्यौं फिरै, साबधान किन होय।

जम जौरा तकि मारि है, घरी पहरि मैं तोय॥

सुंदरदास

मेरै मंदिर माल धन, मेरौ सकल कुटुंब।

सुंदर ज्यौं को त्यौं रहै, काल दियौ जब बंब॥

सुंदरदास

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