यदि तुम्हें आदर्श की बात बोलने में आनंद, सुनने में आनंद, उनकी चिन्ता करने में आनंद, उनका हुक्म पाने पर आनंद, उनके आदर में आनंद, अनादर में भी आनंद हो, उनके नाम से हृदय उछल पड़े—मैं निश्चय कहता हूँ, अपने उन्नयन के लिए तुम और नहीं सोचो।
अनुवाद :
श्रीरामनंदन प्रसाद