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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

यदि श्वास-प्रश्वास की गति लयबद्ध या नियमित की जाए, तो शरीर के सारे परमाणु एक ही दिशा में गतिशील होने का प्रयत्न करेंगे।