यदि नेता बनना चाहते हो; तो नेतृत्व का अहंकार त्याग करो, अपना गुणगान छोड़ दो, दूसरे के हित के लिए यथासर्वस्य दाँव पर लगा दो और जो मंगल एवं सत्य हो, स्वयं वही करके दिखाओ और सभी से प्रेम के साथ बोलो, देखोगे हज़ार-हज़ार लोग तुम्हारा अनुसरण करेंगे।
अनुवाद :
श्रीरामनंदन प्रसाद