यदि किसी दिन अपने प्रेमास्पाद को सर्वस्व न्योछावर कर निमज्जित हुए हो, और सतह आ जाने की आशंका देखते हो, तो जोर करके तत्क्षण निमज्जित होकर विगतप्राण हो जाओ—देखोगे प्रेमास्पद कितने सुंदर हैं, किस प्रकार तुम्हें आलिंगन किए हुए हैं।
अनुवाद :
श्रीरामनंदन प्रसाद