Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

यदि हम मनुष्यजीवन के संपूर्ण क्षेत्र को लेते हैं, तो सूरदासजी की दृष्टि परिमित दिखाई पड़ती है। पर यदि उनके चुने हुए क्षेत्रों (शृंगार और वात्सल्य) को लेते हैं, तो उनके भीतर उनकी पहुँच का विस्तार बहुत अधिक पाते हैं। उन क्षेत्रों में इतना अंतर्दृष्टि विस्तार, और किसी कवि का नहीं।