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विनोबा भावे के उद्धरण

विरोध, वाक्पटुत्व, प्राणीमात्र से छल, उपहास, मर्मस्पर्शी संभाषण, आवेगयुक्त संभाषण, निंदा आदि जो आज कौशल्य माना जाता हैं, उन्हें ज्ञानदेव ने वाणी के अवगुण कहे हैं।